कंगना के चीरहरण से महाभारत2.0 का बीजारोपण

महाभारत का एक सन्दर्भ बताता चलूं, जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था तो उस समय द्रौपदी अपनी प्रतिष्ठा और रक्षा के लिए चिल्ला चिल्ला कर वहां पर बैठे बड़े बुद्धिजीवी जैसे द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, भीष्म आदि से प्रश्न पूंछ रही थी कि, जो पति पहले से गुलाम हो चुका है किसी का दास हो चुका है उसकी अपनी कोई मिल्कियत नही हो, तो वो मुझे जुए में कैसे लगा सकता है, तो उस समय के बुद्धिजीवी वर्ग द्रौपदी को धर्म और क़ानून की बाते बताते रहे और द्रौपदी का चीरहरण चलता रहा.

द्वापर युग में कौरवों द्वारा द्रौपदी का चीरहरण की घटना और आज कलयुग में कंगना राणावत के साथ महा विकास अघाड़ी सरकार का निरंकुश बर्ताव, दोनों घटनाओ में मौलिक समानता दीख पड़ती है. ये नये महाभारत2.0 जैसे भयानक युद्ध का बीजारोपण.

अभी हाल ही 24 -25 अगस्त 2020 को महाराष्ट्र प्रदेश के रायगढ़ जिला के शहर महाड में एक रिहायशी बहुमंजिला मकान के गिरने से 12 लोग की दर्दनाक मौत हो गयी और दर्जनों घायल है, प्रशासन निद्रा में रहा लोग मरते रहे. उधर कंगना राणावत के साथ महा विकास अघाड़ी सरकार का अति उत्साही व्यवहार कानून को धता बता कर सत्ता के मद में चूर बदले की कार्यवाही कर रही है और TV मीडिया पर आ कर महा विकास अघाड़ी सरकार क़ानून दिखाती है अलग अलग धाराएँ गिनवा रही है. जबकि उच्च न्यायालय का आदेश था की जबतक महामारी करोना रहती है, तब तक कोई मकान विध्वंस नही कर सकते और अगर बहुत जरुरी है तो न्यायालय से अनुमति ले कर करे और ये समयसीमा 30 सितम्बर 2020 तक के लिए लागू है.

हज़ारो सालो से राजा महाराजा बादशाहों ने अनेको कानून दिखाए, कानून से कही अधिक महत्वपूर्ण उसके पीछे का उदेश्य होता है

अनेक आंकड़ो के अनुसार 80 प्रतिशत मुंबई ही अनधिकृत है. और इसी से आता है पुनर्विकास का सिधांत जिसमे पहले अनधिकृत को अधिकृत करो फिर उसका पुनर्विकास. हर मानसून (बारिश) के समय बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को सैकड़ो जर्जर मकान को गिराने का कार्य रहता है जो की आम जन जीवन के लिए खतरा बना रहता है, लेकिन उस दिशा में BMC की चाल कछुए की है और अक्सर लोग मकानो के गिरने से उसका शिकार बन जीवन से हाथ धो बैठते है, ये सरकारो की अपनी प्राथमिकता होती है उसका अहंकार बड़ा है या फिर जनसेवा.

भारतीय समाज के बहुत बड़े वर्ग में मैं एक प्रकार की मानसिकता कमजोरी के होने का अनुभव करता हूँ, उस बड़े वर्ग का हमेशा से ये वही प्रश्न रहता है कि, जैसे कंगना राणावत पर महाराष्ट्र की सरकार की दमनकारी नीतियों पर बॉलीवुड, मीडिया, बुद्धिजीवी, फेमिनिस्ट अदि लोगो ने चुप्पी क्यों साध रखी है, इस भारतीय समाज के बड़े वर्ग की उर्जा का अधिकतम हिस्सा इन्ही चुप्पी साधे लोगो से सवाल पूछने में ख़र्च हो जाता है. ये एक प्रकार से इन नकारात्मक लोगो के समूह से निरर्थक की उम्मीदें लगाना होता है, जबकि इसी समूह के पीछे छुप कर असली चालबाज अपनी चाले चलता रहता है.

एक बात समझने की है आप सच के साथ खड़े होते हो और किसी के लिए निःस्वार्थ भाव से न्याय की गुहार लगते है जैसे सुशांत सिंह राजपूत का केस हो या फिर अब कंगना राणावत का, तो ये बॉलीवुड, मीडिया, बुद्धिजीवी, फेमिनिस्ट अदि लोग हमेशा आप के विपरीत खड़े नज़र क्यों आते है?सच ये है कि, जिसके ऊँचाई चढ़ने की नीव/पाया ही क्राइम, दलाल, चाटुकारिता, माफियागिरी आदि का है वो हमेशा क्राइम के साथ ही खड़े होगा, कहावत है “ चोर चोर मौसेरे भाई”. अगर वो लोग आप को उनकी ख़ुद की हैसियत से नुकसान नही पंहुचा पायेगा, तो वो झुंड उस व्यति या संस्था के पीछे खड़े मिलेंगे जो आप को बर्बाद करने की चेष्टा करेगा. वो लोग बार बार अपने इरादे को व्यक्त करते रहते है चेहरे साफ़ है उनके, उनको लेके आप बुरा क्यों मानते है, उनका इरादा बिलकुल साफ़ है की उन्हे क्या करना है . ये तो आप द्वारा आप को ही प्रभावित करने वाले व्यक्तित्व अथवा व्यक्तित्वतो के चयन करने के आप के ही तरीके पर बड़ा सवाल है.

आप सच्चाई नकार सकते है लेकिन उसके दुष्परिणाम नकार नही सकते

मैं इस महाभारत के बीजारोपण के साथ अभियान कांग्रेस मुक्त भारत 2.0 को देखता हूँ, पहला अभियान कांग्रेस मुक्त भारत 1.0 एक राजनीतिक अभियान था जिसका परिणाम आप सब देख चुके है. कांग्रेस मुक्त भारत 2.0 का अभियान कांग्रेस द्वारा 70 साल में बनाये गये पारिस्थितिकी तंत्र(ecosystem) से मुक्ति का अभियान है.

अगली कड़ी में कांग्रेस मुक्त भारत 2.0 अभियान के बार में विस्तार लेखन होगा

Artwork dedicated by Tanvi Shah

5 Comments

  • chandrakant

    सितम्बर 12, 2020 - 7:20 पूर्वाह्न
  • Harsh Shrivastava

    सितम्बर 12, 2020 - 11:20 पूर्वाह्न

    आपका आकलन हमेशा एकदम सटीक होता है। हिंदुस्तान में दोग्लों की कमी नहीं है, जयचन्द भरे पड़े हैं। में तो इस बात से हत्प्रभ हूं कि देश से गद्दारी करने वाले मौज कर रहे है एवं देश भक्तों को हर प्रकार की पृतार्णा झेलनी पड़ रही है। वो समय कब आयेगा कि देश का हर नागरिक चैन से जी सकेगा।

  • Vikas Pandey

    सितम्बर 12, 2020 - 12:46 अपराह्न
  • Vikas Pandey

    सितम्बर 12, 2020 - 12:48 अपराह्न

    धन्यवाद आप के उत्साहवर्धन के लिए ..

    समय है सबका इलाज़ करता है

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