दुष्काल की तीसरी लहर [?] सतर्कता जरूरी है

दुष्काल की तीसरी लहर [?] सतर्कता जरूरी है

कोरोना दुष्काल की पहली और दूसरी लहर के जो आंकड़े सामने आये हैं,  वे  तीसरी लहर की  भविष्यवाणी तो नहीं करते पर गम्भीर  सतर्कता बरतने की चेतावनी देते हैं | जैसे दूसरी लहर में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या पहली लहर के मुकाबले ३ प्रतिशत ज्यादा थी इसमें कुल मिलाकर १३४१२  रिकॉर्ड देखे गए थे| हर आयु वर्ग में पहली लहर के मुकाबले ज्यादा मौतें हुई, जबकि२० वर्ष से कम उम्र के लोगों की दूसरी लहर में कम मौतें हुईं| कुल मिलाकर पहली लहर में १०५८  मरीजों की जान गई जो कुल आंकड़े का १० प्रतिशत है| दूसरी लहर में ४०३  यानी १३ प्रतिशत लोगों की मौत हुई |अगर उम्र के हिसाब से देखें तो दूसरी लहर में २०  वर्ष से कम उम्र के ६  लोगों की जान गई यानी कुल४.७ प्रतिशत |जबकि पहली लहर में २३  लोगों की जान गई, प्रतिशत में यह ६.१ प्रतिशत था| २०  से ३९  आयु वर्ग में दूसरी लहर में ६. प्रतिशत लोगों की जान गई जबकि पहली में ३.५ प्रतिशत लोगों की जान गई|बीमारी के मापदंड से देखें तो कोरोना वायरस के मरीजों में सबसे ज्यादा हाई ब्लड प्रेशर के मरीज संक्रमित हुए| दूसरी लहर में२७.६ प्रतिशत मरीजों को हाई बी पी था, ५प्रतिशत मरीज डायबिटीज के थे, ४ प्रतिशत  मरीज दिल की बीमारी के थे| १ प्रतिशत जिन्हें सांस की बीमारी थी और १ प्रतिशत मरीजों को ही अस्थमा| जबकि पहली लहर में भी सबसे ज्यादा मरीज हाई ब्लड प्रेशर के ही थे| ३४ प्रतिशत मरीजों को हाई बीपी था २६.५ प्रतिशत मरीजों को डायबिटीज थी| दिल की बीमारी के शिकार ७ प्रतिशत मरीजों को पहली लहर में कोरोना हुआ| सांस की बीमारी वाले १.९ प्रतिशत और अस्थमा की बीमारी वाले भी १.९ प्रतिशत मरीज पहली लहर में कोरोना के शिकार हुए थे |
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ,एम्स और नेशनल क्लीनिकल रजिस्ट्री ने कोरोना की पहली और दूसरी लहर का यह आंकलन किया है| दोनों के बीच में कुछ बड़े फर्क सामने आए हैं| यह  सर्वे इंडियन जर्नल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च में छपा है| यह आंकलन १८९६१  मरीजों पर किया गया |जिसमें से पहली लहर के १२०५९ मरीज थे और दूसरी लहर के ६९०३  मरीज हैं|
सर्वे के नतीजे कहते हैं किदूसरी लहर में चपेट में आने वाले लोगों की औसत उम्र पहली लहर के मुकाबले काफी कम थी| दूसरी लहर में ४८.७ वर्ष उम्र के लोग चपेट में आये जबकि पहली लहर में यह आयु लगभग५१ वर्ष थी. हालांकि दोनों ही लहर में ७० प्रतिशत मरीज ४० वर्ष की उम्र से ज्यादा के थे |दूसरी लहर में पुरुषों की संख्या पहली लहर के मुकाबले थोड़ी सी कम रही| दूसरी लहर में ६३.७ प्रतिशत पुरुष चपेट में आए जबकि पहली लहर में ६५.४ प्रतिशत पुरुष कोरोना वायरस की चपेट में आए थे|
इसी तरह दूसरी लहर में प्रतिशत मरीजों ने सांस की तकलीफ की शिकायत की, जबकि पहली लहर में ४३ प्रतिशत मरीजों ने यह शिकायत की थी| दूसरी लहर में१३ प्रतिशत यानी १४२२  मरीजों को एक्यूट रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम हुआ जबकि पहली लहर में यह संख्या८८० मरीजों की यानी तकरीबन ८ प्रतिशत रही. दूसरी लहर में ऑक्सीजन की खपत काफी तेजी से बढ़ी ५० प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी |जबकि पहली लहर में ४२..७ प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी थी| वेंटिलेटर के मामले में भी ऐसा ही रहा| १६ प्रतिशत मरीजों को दूसरी लहर में वेंटिलेटर पर जाने की जरूरत पड़ी जबकि पहली लहर में ११ प्रतिशत  मरीजों को इसकी जरूरत पड़ी थी| आंकड़े कहते है तीसरी लहर की भविष्यवाणी कभी भी हो कैसी भी हो सतर्कता जरूरी है |

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