नरेन्द्र मोदी का कांग्रेस मुक्त भारत 2.0 अभियान

नरेन्द्र मोदी का कांग्रेस मुक्त भारत 2.0 अभियान

कहते है न कि कोई भी सिनेमा अच्छा तब बनता है जब उसकी स्क्रिप्ट (कथानक) अच्छी और समय सीमा में कसी हुई हो, अगर स्क्रिप्ट सटीक नही होती है तो आप बढे बढे चेहरे लाकर भी सिनेमा को सफल नही करवा सकते.

जो लोग नरेन्द्र मोदी को करीब से जानते अथवा उनकी कार्यप्रणाली को समझते है वो बताते है की मोदी कोई भी बड़ा सुधार करने से पहले उस सुधार को कार्यान्वयन कैसे करना है उसकी स्क्रिप्ट पहले से लिख के रखते है, समय सीमा तय करने  के साथ कौन कौन उसका पात्र होगा उसका भी निर्धारण कर लेते है, साथ में काल के अनुरूप होने वाले बदलाव के अनुसार स्क्रिप्ट में क्या बदलाव हो सकता है उसके लिए भी रिक्त स्थान छोड़ना उनको आता है. जब स्क्रिप्ट लिखकर तैयार हो जाती है, तो फिर शुरू होता है अनुकूल और सटीक समय का इंतज़ार. नरेन्द्र मोदी की इसी स्क्रिप्ट लेखन और कार्यान्वयन की कड़ी में एक स्क्रिप्ट है “कांग्रेस मुक्त भारत 2.0 अभियान” ये स्क्रिप्ट किसी मूवी के तर्ज पर नही बल्कि आजकल प्रचलित हुए वेब सीरिज़ (Web Series) के तर्ज पर लिखा हुआ है, जिसके आगे अलग अलग पड़ाव आयेंगे और बिलकुल अलग अलग अध्याय दिखेंगे, लेकिन सबका आखिरी उद्देश्य कांग्रेस मुक्त भारत 2.0 है.

आप के मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा की नरेन्द्र मोदी तो 2014 से कांग्रेस मुक्त भारत का अभियान चलाया रहे है फिर ये कांग्रेस मुक्त भारत 2.0 अभियान पहले से अलग कैसे है ?, मैंने इसमें बारे में हल्की की झलक मेरे पहले के लेख के अंत में किया था.

“पहला अभियान कांग्रेस मुक्त भारत 1.0 एक राजनीतिक अभियान था जिसका परिणाम आप सब देख चुके है, कांग्रेस मुक्त भारत 2.0 का अभियान कांग्रेस द्वारा 70 साल में बनाये गये पारिस्थितिकी तंत्र(ecosystem) से मुक्ति का अभियान है”

प्रथम खंड(Episode 1)– “मीडिया”

नरेन्द्र मोदी के गुजरात में सत्ता के फलक पर आते ही भारत का एजेंडा पोषित प्रमुख मीडिया समूह मोदी को निशाने बनाने लगे जिसको पहले मोदी ने जवाब दे दे कर शांत करने के विफल प्रयास किये, फिर बाद में चुप्पी साध कर काम चलाया, उसकी मज़बूरी ये थी की उसके पास विकल्प के नाम पर न सोशल मीडिया था और न ही वैकल्पिक मीडिया, तो ये सब जैसे तैसे चलता रहा.

 2012 दिसम्बर में हो रहे गुजरात विधानसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी एकबार फिर गुजरात के मुख्यमंत्री बनने की तैयारी नही बल्कि उनकी असली निशाना दिल्ली की सत्ता पर था, जिसको एजेंडा पोषित पत्रकार बहुत हल्के में ले रहे थे, पत्रकारों के इसी हल्के व्यवहार ने नरेन्द्र मोदी को तेजी से लोकप्रिय होते सोशल मीडिया को ही अपनी वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का साहस किया, जिससे उनकी आवाज लोगो तक पहुचे वो भी बिना किसी लाग लपेट के, और इसी कड़ी में 2014 के चुनाव में BJP ने सोशल मीडिया को अपना प्रमुख हथियार बनाया और जम कर इस्तेमाल किया. सोशल मीडिया ने धीरे धीरे स्वंभू पत्रकारों को बेनकाब करना शुरू किया तो इसका इतना प्रभाव हुआ की कुछ ही समय के बाद जैसे सोशल मीडिया vs TV/प्रिंट मीडिया का द्वंद छिड गया हो. सोशल मीडिया पर तरह तरह के प्रतिबंध लगाने की कवायदे स्वंभू पत्रकारों और राजनीतिक पार्टियों ने करने की कोशिश की भी लेकिन जब कोई आन्दोलन जनता स्वयं अपने हाथ में ले लेती है तो उसको रोकना आसान नही होता.

अब जरा सोचिये इसमें कितना विरोधभास है जो स्वंभू एजेंडा पोषित पत्रकार सोशल मीडिया पर लगाम लगाने की बाते करते थे आज कल वही सब लोग अपने अपने मालिको के निर्देश पर नरेन्द्र मोदी को घेरने सोशल मीडिया पर अकाउंट खोल खोल विरोध में दिन रात एक किये हुए है.

मैंने इस लेख के शुरुवात में बताया है की नरेन्द्र मोदी बिना एक सटीक स्क्रिप्ट के कोई भी सामाजिक बदलाव लाने वाले कार्य नही करते है और यहाँ तो बात प्रमुख पाखंडी बुद्धजीवी वर्ग से लडाई की है तो स्क्रिप्ट में कसाव बहुत जरुरी है. जब 2013-14 के समय का प्रमुख TV मीडिया मोदी से 2014 के हाथो बुरी तरह पराजित होने के बाद के समय में उन्हे घेरने सोशल मीडिया पर अकाउंट खोल रहा था तो मोदी भी उसी समय में एक कदम आगे चल के वैकल्पिक TV/ डिजिटल मीडिया के लिए स्थान बना रहे थे. बेनाकाब हो चुके पत्रकारों के स्थान को भरने के लिए नये नये समूहों ने धीरे धीरे लोगो के बीच दस्तक देने शुरू किया, और हुआ ये की आप सब को पहली बार समाज के दुसरे पक्ष की बातो को भी सुनने/ पढने को आसानी से मिलने लगा.

उधर बेनाकाब हो चुके पत्रकारों, कांग्रेस और कांग्रेस जनित राजनीतिक पार्टियों ने सोशल मीडिया पर धर पकड़ करने की उनके पुराने तरीके को आजमाना शुरू किया और इन कार्यो में उनकी विशेष दक्षता के चलते उन्हें सफलता भी मिलनी शुरू हुई. विपक्ष ने इसी मारक क्षमता को धार देने के लिए  #Cambridge_Analytica और इसके जैसे न जाने कितने प्रयोग की किये गये.

सोशल मीडिया पर बेनकाब हो चुके पत्रकारों, कांग्रेस और कांग्रेस जनित राजनीतिक पार्टियों को मिल रही सफलता को मैं एक नरेन्द्र मोदी द्वारा बिछाये गये जाल(trap) के रूप में देखता हूँ.  मोदी चाहते थे की ये लोग सोशल मीडिया की सफलता को ही जनता का वोट समझ बैठे जैसा की हुआ भी. अगर आप राजनीती में रूचि रखते है तो एक बात पर गौर किया होगा की 2019 के चुनाव में नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम ने सोशल मीडिया जोरदार तरीके से इस्तेमाल नही किया जैसे की 2014 में किया था, और इसकी शिकायत अधिकतर बहुत सारे मोदी समर्थक सोशल मीडिया पर करते भी थे. पर समझने की बात ये है की मोदी 2014-15 से ही सोशल मीडिया से आगे निकल चुके है और 2019 लोकसभा चुनाव में उन्होने उस वैकल्पिक TV/डिजिटल मीडिया का खूब इस्तेमाल किया जिसके लिए रास्ता वो 2014 से बना रहे थे.नरेन्द्र मोदी अब सोशल मीडिया से आगे निकल चुके है लेकिन इस सच्चाई को पहले की तरह इस बार भी मोदी विरोधी समझने को तैयार नही है.

एक बात समझना बहुत जरुरी है अगर मोदी को पराजित करना है तो सबसे पहले नरेन्द्र मोदी कौन है और उनकी कार्यशैली क्या है उसकी समझ होना बहुत जरुरी है.

दूसरा खंड जल्द आएगा..

image source IBNLive.com

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